शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

संतरे की वो फांक..

"मम्मी देखो कितनी छोटी फांक है!" वो  संतरा खा रही थी और एक छोटी सी फांक पर उसकी नज़र पड़ी.
"बेटा उसे फेंक दे."
"क्यों मम्मी?"
"क्योंकि ऐसी फांक खाने से.. तेरे पापा को भगवान् ले जाएगा."
"अरे ऐसा क्यों होगा? कहाँ लिखा है ऐसा? ये भी कोई बात हुई कि छोटी फांक खाने से पापा .."
"अब है तो है..मत खा उसे."
उसने  फांक छोड़ दी. आठ साल की थी वो. अंधविश्वास से बहुत अधिक पाला नहीं पड़ा था, मन नहीं मान रहा था पर जहां पापा कि ज़िन्दगी का सवाल था वहाँ रिस्क लेने की भी हिम्मत नहीं थी.

धीरे धीरे बड़ी हुई. बहुत से ऐसे अंधविश्वासों की उसने  धज्जियां उड़ा दीं. बिल्ली रास्ता काट जाती तो वो और खुश होकर आगे बढती. नाखून काटने की याद उसी दिन आती जिस दिन मंगलवार होता. शनिवार को दुनिया भर की शौपिंग करती (शनिवार को नयी चीज़ें खरीदने से मना किया जाता है खासकर धातु की पर उसकी  समस्या ये थी की पूरे सप्ताह में वही दिन होता था जब थोडा वक़्त मिलता था ये सब काम करने का)
विज्ञान  में उसकी  विशेष रुचि होने से इस प्रवृति को और संबल मिलता. वो किसी भी ऐसी वैसी हिदायत मिलने पर उसका कारण पूछती. कुछ कुछ बातों का उसे  तर्क भी मिल जाता और फिर वो उन्हें अंधविश्वास की श्रेणी से हटा देती.

लेकिन संतरे की कोई छोटी फांक मिलती तो वो उसे सीधे सीधे फेंक देती. उसका उसे कोई तर्क नहीं मिला, कैसे उसे खाने से पापा की जान को खतरा हो सकता है? पर मन नहीं मानता. छोटी मोटी बातों के लिए इतनी बड़ी चीज़ दांव पर लगाना, उससे  न हो पाता.
कल दोपहर में खाना खाने के बाद एक संतरा छीलते हुए  एक छोटी फांक पर उसकी  नज़र पड़ी. आदतन उसे फेंकने को हाथ उठाया, फिर याद आया..  पापा को तो भगवान् ले गए ..एक महीने पहले..वो  मिल भी नहीं पायी थी  उनसे..इतनी जल्दी सब कुछ हो गया..
जबकि उसने  भूल से भी कभी संतरे की वो छोटी फांक नहीं खायी थी..फिर भी.. अब क्या उसे  मान लेना चाहिए की वो एक अंधविश्वास था? अब क्या वो  उस आदत को बदल सकती थी ?

उसने एक हाथ से वह छोटी सी फांक अलग करके फेंक दी.


7 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर बात कही आप ने. धन्यवाद

Nawal ने कहा…

Sach mein... muhjhe bhi ab bhi wo chhoti see faank khane kee himmat nahee hoti hai!!! bahot achchha likhti hai..

E-Guru Rajeev ने कहा…

हालाँकि हम संतरे की छोटी फांक से जुडी बात को नहीं जानते, पर इसका अर्थ यह नहीं है कि वह गलत है.
हमेँ इन बातों के पीछे की सही बात जानने की पूरी कोशिश करनी चाहिये.

Rashida K ने कहा…

Very interesting. But it's my thought that she needed to finally consume it..not throw it away as she did earlier...

varsha ने कहा…

Thanks Rashida but believe me..you wouldn't have done that..
It's a true story that happened to me last year..I couldn't do it..

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

ये बात तो हमें नही पता । अंधविश्वास हम पर हावी न हो इसकी पूरी कोशिश करती हूँ पर बडों कि बात रख भी लेती हूँ ।

PD ने कहा…

छोटी सी मगर अच्छी कहानी..