सोमवार, 31 अगस्त 2009

चिन्ना की शह, मेहरू की मात

मेहरू और चिन्ना
बंद कमरे में बैठे थे
विभाजन करें या न करें
इस पर चिंतन करते थे

बोले चिन्ना “ ड्रा करते हें
“हाँ” आया तो विभाजन होगा
“ना” होगा तो बिन्दुस्तान
एक अखंडित वतन होगा.

मेहरू राज़ी हो गए
चिन्ना ने दो पर्चियां बनायी
दोनों में “हाँ” लिखकर
मेहरू को पर्चियां थमाई

मेहरू ने पर्ची उठायी
“हाँ ” देखकर आँख भर आई
देश का विभाजन हुआ
चिन्ना ने पर्चियां जेब में पहुंचाई.

चिन्ना को अलविदा कहते
मेहरू गले लगकर रोये
चिन्ना भी आश्चर्यचकित थे
इतना प्यार थे मेहरू छुपाये.

एक साल में चिन्ना को
यमलोक से बुलावा आया
जन्नत भेजें या जहन्नुम में
चित्रगुप्त को समझ न आया

बोले चिन्ना " ड्रा करते हें
“हाँ” होगा तो जन्नत होगी"
और जेब से पर्चियां निकाल
चित्रगुप्त को थमा दीं

चित्रगुप्त ने एक पर्ची खोली
और सदमे में आ गए चिन्ना
इन पर तो था ‘हाँ’ लिखा हुआ
अब क्यों इनपर दीखता है ना ’

गए जहन्नुम, देखा जाकर
खोली उसने दूसरी पर्ची
लिखा ‘ना' था उस पर भी
और लिखावट मेहरू की थी!

गले लगाकर जाते जाते
मेहरू ने ना प्यार जताया
धूर्त चिन्ना को उसी के दांव से
मेहरू ने जहन्नुम पहुंचाया.

6 टिप्‍पणियां:

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

क्या कहूँ,स अब आपकी रचना में निहित है

Apoorv ने कहा…

बहुत सही बात कही है आपने..

Apoorv ने कहा…

वर्षा जी..ब्लोग पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर मुझ जैसे नवागत ब्लागर का उत्साह बढाने के लिये तहे-दिल से शुक्रिया..उम्मीद है आगे भी आपके रचनात्मक सुझाव और प्रतिक्रिया मिलती रहेगी..बहुत बहुत आभार!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

सही बात कही है आपने..बहुत बहुत बधाई....

अर्शिया ने कहा…

जिंदगी के करीब से गुजरती है ये कविता लेकिन इसके बावजूद दिल में अपने निशान छोड जाती है।
( Treasurer-S. T. )

गर्दूं-गाफिल ने कहा…

vah varsha vah
shandar
anand aa gaya
hm to hanse pr dil roya
do logo kee chalbaajiyon ne
mera vatan duboya

pr itna sunder vyang geet likh dala tumne
nischay hee peeda bhogee hogee bharee
badhai