शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

लीची, आम, और मायाजाल


हाल ही में मैंने लीची व आम जैसे फलों से एक सारगर्भित बात जानी है। इससे मेरा माया-मोह पर से विश्वास एक साल के लिए उठ गया है।


क्या करें, लीची व आम मेरे सर्वाधिक पसंदीदा फल हें, लेकिन आने से पहले जाने की तारीख बता जाते हें। इस बार भी जब लीची बिकनी शुरू हुई तो मैंने पुराने अनुभवों से सबक लेकर झटपट खूब सारी लीचियां रोज खानी शुरू कर दीं। जब तक सीज़न ख़त्म हुआ मेरा मन भी लीची से भर चुका था। और अब मेरी नज़र थी आम पर! आम थोड़ा कम भाव खाते हें और आम जनता के साथ ज्यादा वक्त बिताते हें। तो मैंने पूरे तीन महीने आम का जायका लिया और जब वो पचास रुपये किलो मिलने लगे तो मैंने रास्ता नाप लिया।


लेकिन फ़िर मैं दुखी हो गई क्योंकि अब कोई और फल मुझे पसंद नहीं था। मैं बहुत परेशान सी रहने लगी और कमज़ोर भी हो गई। मैंने इश्वर से पूछा की क्यों वो ऐसे खेल मेरे साथ खेलता है, क्यों नही इन फलों को साल भर उपलब्ध कराता? पर कोई जवाब नहीं मिला।


फ़िर एक दिन मैं दुखी मन से सब्जी खरीद रही थी, की मेरी नज़र फूल गोभी पर पड़ी। मुझे याद आया की अब तो फूल गोभी का सीज़न शुरू होने वाला हैअब मुझे उम्मीद की वो किरण मिल गई जिसे थाम कर मैं यह सीज़न काट सकती।


फ़िर मैंने महसूस किया की यही तो इश्वर की लीला है, यही तो उसका मोह जाल है जो साल भर चलता है। जो जीवन का सही अर्थ जान गया वो इन सब मायाओं से परे होकर जब जो मिलता है उसी में खुश रहता है, बाकी लोग इस मौसम में उस मौसम की यादें लेकर रोते बिलखते हें, और उस मौसम में इस मौसम की!


फ़िर मैंने निर्णय लिया की जिस मौसम में जो मिलेगा उसी में संतुष्ट रहूंगी। लेकिन यह सिर्फ़ एक साल के लिए है, उसके बाद फ़िर लीची, फ़िर आम, और फ़िर वही मायाजाल!

3 टिप्‍पणियां:

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

लीची और आम तो हमें भी पसंद है । लेकिन साल भरा तो सिर्फ केले ही मिलते हैं ।

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

अच्छा लेख है
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तख़लीक़-ए-नज़र

Kailash ने कहा…

लीची तो इसी साल चखी है। आम तो बचपन से फलों और दिलों पे राज किये बैठा है।