मंगलवार, 4 अगस्त 2009

भैया आपने राखी के बंधन को निभाया.


हर बार की तरह इस बार भी रक्षाबंधन पर अपने सभी भाइयों से दूर हूँ, बस इस बात का सुकून है की मेरी राखियाँ सभी को वक्त पर मिल गयीं। (पहली बार!)

बचपन में जब भैया लोग पढ़ाई लिखाई में मशगूल थे और उनके पास मुझे राखी के बदले कुछ उपहार देने के पैसे नही होते थे तो मम्मी ही सबके बदले कुछ मुझे दे दिया करती थी। मैं भी खुश हो जाती थी।
लेकिन एक रक्षाबंधन ऐसा भी था जब मेरे सबसे छोटे भाई ने निश्चय किया की अपने पैसों से मुझे कुछ उपहार देंगे। महीना दो महीना पहले से गुल्लक में यहाँ वहाँ से जुगाड़कर पैसे डालते रहे। राखी के दिन गुल्लक तोड़कर पैसे मेरे हाथ में पकड़ा दिए। मैं नही बता सकती कैसा महसूस हुआ था तब।

मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ की मेरे तीन बड़े भाई हें, सभी ने मेरे जीवन में एक अहम् किरदार निभाया है, सबसे बड़े भैया ने मुझे अपने साथ रखकर पढाया और आज जिस मकाम पर हूँ वहाँ पहुंचाया। दूसरे भैया ने मुझे स्वतंत्र रहकर जीना सिखाया, मेरी गलतियाँ पकड़कर उन्हें सुधारना सिखाया, आत्मविश्वास से परिपूर्ण बनाया, व तीसरे भाई जिनका किस्सा मैंने ऊपर बताया, वो तो भाई कम और एक सबसे करीबी दोस्त अधिक रहे। पूरे स्कूल कॉलेज के दौरान मेरी ज़िन्दगी में कोई बात ऐसी नही हुई जो उन्हें न पता रही हो। आज भी मेरा कोई मित्र उनसे अधिक करीबी नही है। इस तरह से मेरा पूरा व्यक्तित्व मेरे भाइयों की बदौलत निखर पाया है।

एक भाई का होना, ज़िन्दगी बदल देता है। उनसे बढ़कर कोई मित्र, कोई पथप्रदर्शक, कोई संबल नही। पास न रहकर भी वो बहन की रक्षा करता है। ऐसे सुंदर रिश्ते से मेरा आँचल भरने के लिए ईश्वर को मेरा कोटि कोटि धन्यवाद।

3 टिप्‍पणियां:

sanjay vyas ने कहा…

कुछ बेहद खूबसूरत रिश्तों में से एक को अभिव्यक्त करता है रक्षा बंधन.
सुंदर लिखा आपने.

अर्शिया अली ने कहा…

आपके जज्बों को मेरा सलाम पहुंचे.
{ Treasurer-T & S }

गर्दूं-गाफिल ने कहा…

ऐसे सुन्दर आत्मीय रिश्ते भारत की पहचान हैं
आप सी ऐसी भावनाओं से भारत अपना महान है

BADHAI
SWATNTRTA DIVAS KI SHUB KAMNAYEN