गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009

आज मैं खुश हूँ इसलिए कोई फलसफा नही!

आज मैं कोई
कविता नही सुनाउंगी ,
न कोई फलसफा लिखकर
आपको पकाऊंगी ।
आज जो मन में भाव हैं
वही बस उतारूंगी।
न तो मुझे
मोक्ष की चाह है
और न फलविहीन कर्म की।
न तो मुझे
ज्ञान की प्यास है
और न जिज्ञासा किसी धर्म की।
सीधा सरल मेरा जीवन है
वही चूल्हा चौका बर्तन है।
सपने मैं भी बुनती हूँ,
चंचल मेरा भी मन है।
आज मैं बहुत खुश हूँ,
कारण फिर कभी बताउंगी।
संसार में रहकर कैसे
सांसारिकता से मुक्ति पाउंगी?

5 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

थोड़े में ही बहुत कुछ कह दिया आपने ...बहुत अच्छा लिखा है आपने

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बढ़िया कहा आपने

राज भाटिय़ा ने कहा…

आज मैं बहुत खुश हूँ,
कारण फिर कभी बताउंगी।
अजी आप हमेशा खुश रहे, बस यही तमन्ना है कारण चाहे मत बातऒ, लेकिन खुश रहो.
धन्यवाद

Abhishek ने कहा…

काश की बिना कारण भी सब खुश रह पाते. खुशी के लिए कारण का खोज ख़ुद में एक समस्या है. आप सदा खुश रहे बिना कारण के भी. और ज्योतिर्गमय शब्द को यहाँ से ही कॉपी कर अपने ब्लॉग के शीर्षक में पेस्ट कर दे तो वो सही हो जाएगा. सच है कि भावः ज्यादा महत्वपूर्ण है पर शब्द भी सही दिखे तो सोने में सुहागा है न.

गर्दूं-गाफिल ने कहा…

बढ़िया