मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

गुंडागर्दी सही या पब कल्चर?

जीवन की ये कैसी राहें,
इधर कुँआ है उधर है खाई।
रह लेते हें बीच अधर में ,
पूरी दुनिया वहीं समाई!

मंगलोर में गुंडों ने जब
लोकतंत्र पर दाग लगाया,
टीवी अखबारों में सब ने
अधिकारों का गाना गाया।

उतने तक तो ठीक रहा, पर
सोचो आगे क्या आएगा,
विरोध प्रदर्शन के नाम पर
पब में जाना बढ़ जायेगा,
पार्कों में, गलियारों में अब
इश्क लडाना बढ़ जायेगा।

कभी आईये किसी पार्क में
बच्चों बूढों को संग लेकर ,
आँखें ढककर जो न चले तो
रख देंगे हम नाम बदलकर ।

देकर मौलिक अधिकारों को
क्या संविधान ने पिंड छुडाया?
अधिकारों संग जिम्मेदारियों
का भी तो था पाठ पढाया।

फिर क्यों अपनी जिम्मेदारी
याद नही है हमको आती ?
पतन देश का होता है, पर
शर्म नही है हमको आती

हम स्वतंत्र हें, कुछ भी करेंगे,
शराब पियेंगे, ऐश करेंगे।
कच्ची उम्र में सेक्स करेंगे
पुस्तक नही आईपॉड खरीदेंगे ।
भारतीयता ट्रेंड में नही है,
अंग्रेजों की नक़ल करेंगे।

लेकिन मेरा दिल कहता है,
यह सब भी तो ठीक न होगा।
जिसके कंधे देश टिका है,
उसे कौन फ़िर कंधा देगा।

जोर जबरदस्ती अनुचित है,
पर उपाय कोई तो होगा,
ग़लत राह पर हक़ से चलकर
तो कोई उत्थान न होगा।









8 टिप्‍पणियां:

HEY PRABHU YEH TERA PATH ने कहा…

जोर जबरदस्ती अनुचित है,
पर उपाय कोई तो होगा,
ग़लत राह पर हक़ से चलकर
तो कोई उत्थान न होगा।

सटीक विचारो वाली कविता, बधाई

मेरे ब्लोग का भी अवलोकन करे।

विनय ने कहा…

जागो इण्डिया जागो, बहुत अच्छे
बहुत ख़ूब, सुन्दर प्रस्तुति


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गुलाबी कोंपलें | चाँद, बादल और शाम

विष्णु बैरागी ने कहा…

आपकी वेदना मुकाम पर पहुचती है।
व्‍यक्ति का नियन्‍त्रण केवल स्‍वयम् पर है। दूसरे को सुधारने में परिणाम सदैव ही संदिग्‍ध और अनिश्चित रहते हैं जबकि स्‍वयम् को सुधारने में परिणा सदैव ही असंदिग्‍ध और सुनिश्चित होते हैं।
किन्‍तु खुद को कौन सुधारे?

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Wah....सामयिक रचना के लिये बधाई...

PN Subramanian ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना. आप ने कितनी अच्छी बात लिखी है. समय रहते लोग समझ जाएँ तो बेहतर है. आभार.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर बात कही आप ने,
धन्यवाद

बेनामी ने कहा…

बहुत सही बात कही है आपने. श्री राम सेना ने जो किया वो उनकी सोच है पर बड़े शर्म की बात है की उसका विरोध करने के लिए लोगो को उकसाया जा रहा है की गुलाबी चढ्ढी भेजो. कैसा फूहड़ और अभद्र तरीका है मगर अफ़सोस की बात है कि इस अभियान में महिलाये भी भाग ले रही है.

J N Thapliyal ने कहा…

Varshaji, aapne bahot hi sundarta se aaj ki samasya ko vyakt kiya hain.
Aaj ke akhbar mein kuchh samaaj sevikao ke virodh pradarshan ko badhava dene wale bayano ko padh kar bahot dukh hua aur aise waqt mein aapki yah kavita padhkar aisa lag raha hain jaise aapne har chintit mann ke vicharo ko prakat kiya hain.
Bahot achha likha hain aapne.