शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009

राजनीति से दिल न लगाइए!

एक बार दिल्ली यूनिवर्सिटी में
निर्णय लिया गया
कि  छात्रों को अब
'रियल लाइफ' अनुभव दिया जायेगा
और राजनीति पढाने के लिये
साक्षात राजनेताओं को
आमंत्रित किया जायेगा।
उदघाटन के लिए
अटल जी को बुलाया गया
मंच पर पहुंचकर बोले
"प्यारे छात्रों ....
सब विद्यार्थी साँस रोककर खड़े थे
एक मिनट गुजरा ..
दो मिनट गुजरे..
पाँच मिनट बाद बोले
"और छात्राओं .."
लोग धीरे धीरे खिसक लिए।
अगले दिन कल्याण जी आए
"राजनीति में सफलता के लिए
गणित का पंडित होना आवश्यक है
गठबंधन का दौर है
बहुत गुणा  भाग करना पड़ता है।
हर बार नए 'फोर्मूले' बनाने पड़ते हैं। "
मायावती जी बोली
"राजनीति एक कला है
कोई एजेंडा न होते हुए भी
शीर्ष तक जाने की कला। "
अमर सिंह बोले
"परिवार बढ़ाना पड़ता है।
हर फिल्मी सितारे को
छोटा भाई बनाना पड़ता है"
आडवाणी जी बोले
"याददाश्त को थोड़ा आराम देना होता है
आज जारी किए बयान का 
कल कत्लेआम  करना होता है। "
सोनिया जी ने अनुभव बांटे
"मौत के सौदागरों से दूर भागना होता है
बेटे को कुर्सी दिलानी हो
तो पहले ख़ुद त्यागना होता है। "
राहुल जी भी क्यों पीछे रहते।
"बहुत ईजी है,
महीने दो महीने में
रियल इंडिया देखना होता है।"
अंत में माननीय
मनमोहन जी को बुलाया गया
इतना कहकर चल दिए
"इससे दिल न लगाइए
और गलती से लग गया, तो
खूब बादाम खाइए, खूब बादाम खाइए। "






9 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

हाँ ...हाँ हाँ हाँ .......बहुत खूब भाई छा गये ...मैदान मार लिया


अनिल कान्त
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

राजनैतिक नेताओं के प्रति रचना में उद्वेलित भाव अच्छे लगे.
बधाई
- विजय

सुरेन्द्र Verma ने कहा…

"Aam ki bagiya" sheershak utani hi achchhi hai jitani swad mein. rajnit ka mazak har insan kar raha kintu rajnit bina nind bhi bhi kanha re........

राज भाटिय़ा ने कहा…

अरे मनमोहन जी बिन मेडम के केसे बोले????
धन्यवाद वर्षा जी, बहुत सुंदर कविता के लिये

विनय ने कहा…

बिल्कुल सत्य कविता!

sanjay vyas ने कहा…

मुझे अच्छा लगा कि कविता में अमूर्तन और आत्मालाप नहीं है बल्कि हमारे अपने सरोकार है जिन्हें आपने चुटीले अंदाज़ में पेश किया है.

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन रचना...अब बादाम खायेंगे. :)

ARVI'nd ने कहा…

yatharth aur hashya se paripurna.....bahut maja aaya padhkar.

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया अंदाज में लिखा है....