मंगलवार, 6 जनवरी 2009

ट्रक ड्राईवर की philosophy

एक बार NDTV में
एक चर्चा का आयोजन हुआ
दिग्गज हस्तियाँ मंच पर पधारी
आम आदमी को भी
औडिएंस बनाकर शामिल किया गया
बरखा दत्त जी ने शुरुआत की
“कौन जिम्मेदार है
देश और समाज की बर्बादी के लिए
नेता, beaurocrats या फिर हम सब?”
मायावती जी बीच में बोल पड़ी
“हम ने तो दलित समाज के उत्थान में
कोई कसर नही छोड़ी है..”
“लालूजी बोले “ जी आपकी प्रतिमाएं तो
कोई उत्थान नही करती..
क्यों न आप ख़ुद प्रतिमा बनकर खड़ी हो जाएँ”
इससे पहले की मामला उलझता
बरखा जी ने ब्रेक का एलान कर दिया
फिर मेनका जी की बारी आई
“इंसान अगर जानवरों से मिलजुल कर रहे
तो विश्व में सौहार्द फैलेगा”
औडिएंस ने प्रश्न किया
“लेकिन शेर और बकरी में भी तो सौहार्द नही होता”
“हाँ लेकिन शेर बकरी का
दूध तो नही पी जाता!”
इस पर चिदंबरम जी बोल पड़े
“This mess is all because of
the unregulated free market economy”
औडिएंस को कुछ पूछते नही बना
तो इला भट्ट जी बोल पड़ी
“जिस समाज मैं महिला को
दोयम दर्जा दिया जाए
उसका उत्थान कैसे होगा??”
शशि थरूर जी बोले
“US में ओबामा आने के बाद
अब उम्मीद नज़र आ रही है”
शोभा दे जी बोली
“सोसाइटी का फ्रेमवर्क टूट गया है
Family values नही रह गई”
लोग बोलते गए, औडिएंस सुनती गई
अंत में बरखा जी ने
आम आदमी की राय जाननी चाही
माइक एक ट्रक ड्राईवर को पकड़ा दिया
वो थोड़ा सकुचाते हुए बोला
“मैडम, मैं तो बस इतना जानता हूँ
की जब मैं माल लेकर
दिल्ली के लिए निकलता हूँ
तो रास्ते मैं कई शहर आते हैं
कहीं खाना अच्छा मिलता है
कहीं दारू सस्ती मिलती है
मुझे जहाँ भूख लगती है वहाँ रुकता हूँ
थोड़ा आराम करके आगे बढ़ जाता हूँ
अगर पड़ाव में ही रुक जाएँ
तो मंजिल कैसे मिलेगी
ज़िन्दगी भी एक पड़ाव है
जो इसकी माया में फँस गया
वो ये भूल जाता है
की जितनी भी दौलत लूट लें
अंत में तो सब छोड़कर जाना है
मृत्यु ही मंजिल है
एक न एक दिन तो इसे पाना है”

5 टिप्‍पणियां:

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

ट्रक ड्राईवर की फिलासफी रचना की एक ही लाइन में
सारा संदेश पाठक को मिल गया, कि
" अगर पड़ाव में ही रुक जाएँ , तो मंजिल कैसे मिलेगी "
बहुत खूब
बधाई वर्षा जी
- विजय

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत खुब आप ने अपनी कविता मै सभी शेतानो से मिलवा दिया, लेकिन अन्त मै ट्रक ड्राईवर ने सही रास्ता अपने भोले पन से दिखा दिया...
वर्षा जी धन्यवाद

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) ने कहा…

मैं भी राज जी और विजय जी की बात से शत-प्रतिशत सहमत हूँ.....!!

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

आदरणीया वर्षा जी
अभिवंदन
देर से ही सही,
मेरी भी नव वर्ष पर हार्दिक मंगल भावनाएँ स्वीकारें.
बस आप जैसे निश्छल साहित्यकारों की दुआएं साथ रहीं तो मैं लेखन क्षेत्र में जरूर ऐसा लिखने का प्रया करूंगा कि आप निराश नहीं होंगी.
आपका
-विजय
plz aapka e-mail na hone ke kaaran yahaan post karna pada
plz padh kar delete kr den

शाश्‍वत शेखर ने कहा…

ट्रक वाला सबपर भारी पड गया। वैसे ये पिल्ला बहुत cute है।