शनिवार, 17 जनवरी 2009

मुन्नाभाई MP

कल ही सुना था
संजू बाबा चुनाव लडेंगे
मुन्नाभाई का रूप धरेंगे
गांधीगिरी की दुहार देंगे।

कुछ लिखने को हाथ खुजाया
पर जेहन में डर भी आया
कहीं कल को वो MP बन गए
फिर तो हो चुकेगा अपना सफाया..

‘बन्दूक राइफल’ गर पकड़े होते
तो भी होती कोई बात नही
कलम पकड़ना सरासर जुर्म है
इसकी सज़ा यहाँ माफ़ नही.

जनता से न्याय की गुंजाइश क्या करें
वह तो याद इतना रख पाती नहीं
की जो अभी गांधीगिरी का नारा देते हैं
हथियारों के बिना उन्हें नींद आती नहीं..

5 टिप्‍पणियां:

PN Subramanian ने कहा…

सुदर रचना. कलम तलवार से भी ज्यादा घातक बन सकती है. आभार.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर कविता कही ,सुंदर भाव.
धन्यवाद

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

अच्छी भावाभिव्यक्ति के लिये साधुवाद स्वीकारें..

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

बहुत सुंदर कविता कही ,सुंदर भाव.
बहुत सुंदर कविता कही ,सुंदर भाव.
मुझे पहले ही यकीन था कि जबलपुर
से सम्बंधित हैं आप
शुक्रिया खजाना ब्लॉग पर टिप्पणी छोड़ने के लिए
आप भी मीत में आमंत्रित हैं
सादर

Alag sa ने कहा…

ढलती उम्र, घटती लोकप्रियता, भविष्य की अस्थिरता, बढती चिंताएं मजबूर करती हैं, राजनीति रूपी पनाहगार में शरण लेने के लिये।