शुक्रवार, 30 जनवरी 2009

'आम' का अचारी फलसफा


इतना आसाँ नहीं होता
आम से ख़ास बनना।
बड़ी कवायद करनी पड़ती है।
पहले आपको घर से
बेघर किया जाता है।
आपके टुकड़े किए जाते हैं।
तपती धूप में आपको
सुखाया जाता है।
तेल से नहलाया जाता है।
उचित लीपापोती के बाद
एक आकर्षक मर्तबान में
बंदी बनाया जाता है।
आपकी आत्मा तो इस सफर में
आपका साथ नही दे पाती,
आपका कचूमर मगर बाकी ज़िन्दगी
'ख़ास' बन जाता है।

कुछ हासिल करने के लिए
इतना तो यार करना पड़ता है।
एक आम को ख़ास होने के लिए
पहले अचार बनना पड़ता है।

8 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

ख़ास अंदाज़ है इस फलसफे का!

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बात तो ठीक है आप की कि आम से खास बनना आसान नहीं होता......... बेशक..

SUNIL DOGRA जालि‍म ने कहा…

मजा आ गया.... सचमुच दिल में उत्तर गया आम

विवेक सिंह ने कहा…

वर्षा जी आम का अचार तो हमने भी देखा . पर हमें यह आइडिया नहीं आया . आपकी कल्पना शक्ति को मानते हैं हम !

संगीता पुरी ने कहा…

अरे वाह !!!! कमाल का सोंचा है...

राज भाटिय़ा ने कहा…

वर्षा जी, कही आप मेरी बात तो नही कर रही..:)
अजी हम भी आम से खास बन गये है अपनो के लिये, तेल के सिवा सब कुछ हमने भुगता है.
धन्यवाद

COMMON MAN ने कहा…

aam to aam hi rahega, chaahe uska achaar hi kyon n daal den, aam ka to achaar padna hi hai, chahe wo fal ho ya aadmi, pahli baar blog par aaya, bahut acchaa laga.

ilesh ने कहा…

कुछ हासिल करने के लिए
इतना तो यार करना पड़ता है।
एक आम को ख़ास होने के लिए
पहले अचार बनना पड़ता है।

वाह बहुत ही सुंदर लिखा हे.....उम्दा वर्णन......मज़ा आ गया....