रविवार, 25 जनवरी 2009

भारत माँ का दुखडा, नेताओं का मुखडा

मैंने तो किसी से
बैर नही किया
वो क्यों मुझे तंग करना नही छोड़ते।

मुझमें जन्म लिया
मेरी गोद में खेले
पर नाम मेरा वो खुदसे नही जोड़ते।

साल में दो बार
याद कर लेते हैं
इतना ज्यादा तो दुश्मन भी नही मुंह मोड़ते।

क्या धर्म, क्या जात
हर चुनाव में पूछते हैं
क्यों नही वो मुझे मेरे हाल पे छोड़ते।

मैंने तो चाहा था
आँचल में सबको समा लूँ
कहाँ वो मुझे ढकने लायक आँचल ही छोड़ते।

9 टिप्‍पणियां:

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

AKSHAT VICHAR ने कहा…

भारत मां की जय

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

गणतंत्र दिवस के पुनीत पर्व के अवसर पर आपको हार्दिक शुभकामना और बधाई .
महेंद्र मिश्र जबलपुर.

ajay kumar jha ने कहा…

gantantra diwas par behad achhee panktiyaan padhwane ke liye dhanyavaad.

राज भाटिय़ा ने कहा…

गणतंत्र दिवस की आपको हार्दिक शुभकामना !!

Pratap ने कहा…

भारत माँ दुखडा आपके शब्दों ने बहुत ही सजीवता से उकेरा है....
गणतंत्र दिवस की सुभकामनाओं के साथ.

विवेक ने कहा…

काश सभी भारत मां के नजरिए से देखते आपकी तरह...

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा है........गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

विवेक सिंह ने कहा…

गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।