शुक्रवार, 16 जनवरी 2009

राहुल बाबा का विदेशियों को असली भारत दिखाना

हमने तो बस ऊँगली थामी थी

और वो कुंडली जमाकर बैठ गए

बस एक शेर की फरमाइश क्या कर दी

यारो वो तो मंडली जमाकर बैठ गए

सोचा था राहुल बाबा कभी तो थकेंगे

और नही अब् मेरी झोपडी में रुकेंगे

वो तो अपने साथ साथ

विदेशियों को भी लाकर बैठ गए!!

10 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति ...मुझे पसंद आयी

राज भाटिय़ा ने कहा…

असली भारत की तस्वीर दिखा कर अमीर भी तो बनाना है इस ...
कविता बहुत सुंदर लगी.
धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

कविता सुन्दर बन पड़ी है.

शाश्‍वत शेखर ने कहा…

हां आखिर विदेशी को विदेशी पसन्द जो आते हैं। अच्‍छी कविता।

विवेक सिंह ने कहा…

इनके लिए पब्लिक शबरी है और ये राम समझ बैठे हैं स्वयं को !

अनुनाद सिंह ने कहा…

राहुल ने ब्रिटिश विदेशमन्त्री को गांव दिखाने के नाम पर परोक्ष रूप से यही साबित किया है कि वह गुलाम मानसिकता के धनी हैं। क्या ऐसे लोग भारत का बेड़ा पार कर सकेंगे? क्या ऐसे लोगों के हाथ मे भारत सुरक्षित रह पायेगा?

Major Maneka ने कहा…

एक अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकार करे.
खूब लिखें, अच्छा लिखें.

बेनामी ने कहा…

Nicely written. keep writing.

i do not know how people write in hindi on the net. Sorry for writing in english

Reetesh Gupta ने कहा…

यह भी खूब कही ...सही है ...बधाई

रौशन ने कहा…

हमने सुना है आजकल गावों में बच्चों को खाने के लिए इस तरह से कहा जाता है
"जल्दी जल्दी खालो नही तो राहुल बाबा आ के खा जायेंगे "