मंगलवार, 30 दिसंबर 2008

Good China Bad China!!

सुस्ताई सी
शामें हो या
हो अलसाई सी सुबहों पर
यह लगती है
तो आती है
जान मेरे सूखे अधरों पर
इक्की दुक्की
चीज़ें हैं जो
China ने invent करी थी!!
आभारी हूँ
शेन नुंग की
जिसने दुनिया को यह दी थी
पर उतनी ही
मुझे शिकायत
China की दूसरी प्रसिद्धि से
नहीं तृप्त मैं
हो पाती हूँ
उस छोटे चाइना कप में
और चीन की
चाय चाहिए
मुझे बड़े हिन्दुस्तानी मग में.

5 टिप्‍पणियां:

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

बहुत अच्छा िलखा है आपने । जीवन और समाज की िवसंगतियों को यथाथॆपरक ढंग से शब्दबद्ध किया है । नए साल में यह सफर और तेज होगा, एेसी उम्मीद है ।

नए साल का हर पल लेकर आए नई खुशियां । आंखों में बसे सारे सपने पूरे हों । सूरज की िकरणों की तरह फैले आपकी यश कीितॆ । नए साल की हािदॆक शुभकामनाएं

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है- आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग- समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना रची आप ने.
धन्यवाद
नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं!!!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

चाय,कॉफी कुछ भी हो चाहिए हिन्दुस्तानी मग में ही।

PN Subramanian ने कहा…

बहुत सुंदर. पहली नज़र में हमें मग नहीं बाल्टी लगी. कुछ देर बाद ही समझ में आया. नव वर्ष आपके लिए मंगलमय हो.

Amit ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना लगी आपकी...नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये