शनिवार, 6 दिसंबर 2008

जाने कब..

जाने कब
ये साए हटेंगे
मौत के बादल छटेंगे
दिलों में
रौशनी होगी
मुट्ठी में ज़िन्दगी होगी
बंद बहना
खून होगा
हर तरफ़ सुकून होगा
कभी तो वह
दिन आएगा
अमानुष भी थक जाएगा
बन चुकी हर
बात होगी
ज़िन्दगी से मुलाकात होगी

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