बुधवार, 31 दिसंबर 2008

मामूली नस्ल का कुत्ता

वो एक
मामूली नस्ल का कुत्ता है
न वो "हेलो " करता है
और न ही
अखबार मुंह में लेकर आता है
ज़ंजीर में नही टिकता
सड़कों पर घूमता है
बिल्कुल 'सलीकेदार' नही है
बहुत कोशिश की सुधारने की
कभी हाथ से मारा
कभी डंडे से
पर नालायक सुधरा नहीं
टुकुर टुकुर देखता रहा
मेरे पैर चाटता रहा
(ये सब मैंने उसे नहीं सिखाया!!)
आज भी वो
उतना ही बेवकूफ है

पर जब भी मैं
सड़क पर चलती हूँ तो
मेरे पीछे चल पड़ता है
मेरे रास्ते में
आने वालों पर
पागलों सा भोंकता है
बड़े बड़े कुत्तों से
पंगा लिया है
बहुत चोटें भी खायी हें
पर वो अपनी हरकत बंद नही करता
और मुझे 'सही सलामत'
घर तक छोड़कर ही दम लेता है
(फिर वापस गली में चला जाता है!!)

वो एक मामूली नस्ल का कुत्ता है
पर कुछ बातों में
वो अच्छी नस्ल के इंसानों से बेहतर है॥

(यह कविता मेरे वास्तविक पालतू कुत्ते 'मुल्लू' पर आधारित है व उसका वर्णन भी वास्तविक है)








9 टिप्‍पणियां:

Alag sa ने कहा…

अब आप तो उसे मामूली ना कहें।

राधिका बुधकर ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
राधिका बुधकर ने कहा…

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

राज भाटिय़ा ने कहा…

शुकर अग्रेजी मै नही भोकता. ...
नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं !!!नया साल आप सब के जीवन मै खुब खुशियां ले कर आये,ओर पुरे विश्चव मै शातिं ले कर आये.
धन्यवाद

GURUDATT ने कहा…

नया साल मंगलमय हो! काश मुल्लू को पढना आता***

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

आपको, गैर-मामूली मुल्लू को, आपके परिजनों और आपके मित्रों और परिचितों को भी नव वर्ष की शुभकामनाएं. ईश्वर आपको सुख-समृद्धि दे!

अनुराग शर्मा

प्रशांत मलिक ने कहा…

बढ़िया है

Rangraj Iyengar ने कहा…

कुछ दिनों पहले आपका ब्लॉग हाथ लगा. पहले नयी पोस्ॉट की कहानियाँ पढ़ी. बहुत अच्छी लगी. कुछ पर टिम्मणियाँ भी की. अब पूरा ब्लॉग पढ़ने के इरादे से आज मैंने आपकी 2008 की सारी कविताएं पढ़ी. आपका व्यंग बहुत सटीक है. कहानियों में शब्द चयन व बुनाई बहुत सुंदर है. लेकिन एक बात गौर की कि आपने किसी के भी टिप्पणी पर कुछ नहीं कहा. आपका प्रोफाईल भी आपके बारे कुछ नहीं कहता और तो और फोटो भी नहीं लगा रखी है. खैर यह सब आपकी मर्जी पर है.

varsha ने कहा…

जी शुक्रिया! कुछ कारणवश इधर अधिक वक़्त नहीं दे पाती हूँ, पर आपकी बात का जरूर ध्यान रखूंगी।