शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

पप्पू पान वाले के पास
हर बात का जवाब होता था
हम कहते
“गर्मी बहुत हो गई है”
वो बोलते
“ग्लोबल वार्मिंग”
“तेल महंगा हो गया है”
“डिमांड सप्लाई प्रॉब्लम”
“ज़मीन के दाम बढ़ गए”
“स्पेकुलेशन है जी”
"अब गिर क्यों गए?"
"bubble burst हो गया"
“अच्छे डॉक्टर नही मिलते”
“ब्रेन ड्रेन हुज़ूर”
“टाटा को क्या हुआ?”
“ हाई debt लो liquidity”
एक बार लखन चाचा ने पूछ ही लिया
“अरे भाई
पान तो मुफ्त में नही बाँटते
इतना ज्ञान काहे मुफ्त में बाँटते हो?”
पप्पू जी पान में चूना लगाकर बोले
“कारपोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी”

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